Tuesday, July 16, 2019

149 साल बाद गुरु पूर्णिमा पर शनि, केतु और चंद्र के योग के साथ होगा चंद्र ग्रहण, सभी राशियों पर होगा असर

जीवन मंत्र डेस्क. मंगलवार, 16 जुलाई की रात चंद्र ग्रहण होगा। ये ग्रहण भारत में दिखाई देगा। इस बार आषाढ़ मास की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण हो रहा है। भारत के साथ ही ये ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, एशिया, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में दिखाई देगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, रात करीब 1.30 बजे से ग्रहण शुरू हो जाएगा। इसका मोक्ष 17 जुलाई की सुबह करीब 4.30 बजे होगा। ग्रहण पूरे तीन घंटे रहेगा। 149 साल पहले ऐसे दुर्लभ योग बने थे। 12 जुलाई, 1870 को 149 साल पहले गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण हुआ था। उस समय भी शनि, केतु और चंद्र के साथ धनु राशि में स्थित था। सूर्य, राहु के साथ मिथुन राशि में स्थित था।

ग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि जब राहु चंद्र या सूर्य को ग्रसता है, तब ग्रहण होता है। इस संबंध में कथा प्रचलित है कि प्राचीन समय में जब समुद्र मंथन किया गया तब अमृत कलश निकला था। असुर भी अमृतपान करना चाहते थे, लेकिन भगवान विष्णु ने सिर्फ देवताओं को अमृतपान करवाया। उस समय असुर राहु ने देवताओं के साथ भेष बदलकर अमृतपान किया था। सूर्य और चंद्र ने राहु को पहचान लिया और भगवान विष्णु को ये बात बताई। इसके बाद भगवान विष्णु ने राहु का मस्तक धड़ से अलग कर दिया था। चंद्र-सूर्य से बदला लेने के लिए राहु इन ग्रहों को ग्रसता है। जब-जब राहु सूर्य-चंद्र को ग्रसता है, तब-तब ग्रहण होता है।

सूतक का समय
चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। सूतक काल दोपहर 4.30 बजे से शुरू हो जाएगा, जो कि 17 जुलाई की सुबह 4.30 बजे तक रहेगा।

सूतक से पहले करें पूजा-पाठ
16 जुलाई को गुरु पूर्णिमा होने से इस दिन विशेष पूजा-पाठ करने की परंपरा है। इस दिन अपने गुरु की पूजा की जाती है। इस दिन पूजन दोपहर 4.30 बजे से पहले ही करना होगा। उसके बाद सूतक काल शुरु हो जाने से पूजा-पाठ नहीं हो सकेगी।

ग्रहण के समय ग्रहों की स्थिति
शनि और केतु ग्रहण के समय चंद्र के साथ धनु राशि में रहेंगे। इससे ग्रहण का प्रभाव और अधिक बढ़ जाएगा। सूर्य के साथ राहु और शुक्र रहेंगे। सूर्य और चंद्र चार विपरीत ग्रह शुक्र, शनि, राहु और केतु के घेरे में रहेंगे। मंगल नीच का रहेगा। इन ग्रह योगों की वजह से तनाव बढ़ सकता है। भूकंपन का खतरा रहेगा। बाढ़, तूफान और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान होने के योग बन रहे हैं।

कब होता है चंद्र ग्रहण
जब चंद्र पर पृथ्वी की छाया पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है। इस दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्र एक लाइन में आ जाते हैं। ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक शुरू हो जाता है।

ग्रहण के समय क्या करें
ग्रहण के समय मंत्र जाप करना चाहिए। इस दौरान पूजा-पाठ नहीं करनी चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद पूरे घर की सफाई करनी चाहिए। ग्रहण से पहले खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए। इससे खाने पर ग्रहण की नकारात्मक किरणों का असर नहीं होता है।

गुरु पूर्णिमा पर करें गुरु का पूजन
गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु का पूजन करना चाहिए। इस दिन महाभारत के रचियता वेद व्यास की जयंती भी मनाई जाती है। पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा करें। भगवान सत्यनारायण की कथा करें। ये पूजा-पाठ दोपहर 4.30 बजे से पहले ही कर लेना चाहिए।

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