भारत-न्यूजीलैंड के बीच पांच मैच की सीरीज का दूसरा वनडे शनिवार को माउंट माउनगानुई के बे ओवल मैदान पर खेला जाएगा। टीम इंडिया पहला वनडे जीतकर सीरीज में 1-0 से आगे है। टीम इंडिया के लिए राहत की बात यह है कि ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या को खेलने की अनुमति मिल गई है। वे तीसरे वनडे में खेल सकते हैं। हार्दिक ने करण जौहर के चैट शो पर महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद अनिश्चितकाल के लिए उनको सस्पेंड कर दिया गया था।
प्रशासकों की समिति (सीओए) ने गुरुवार को हार्दिक और लोकेश राहुल पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया। हार्दिक न्यूजीलैंड के लिए रवाना हो चुके हैं। वहीं, राहुल इंडिया-ए के साथ जुड़ेंगे। हार्दिक ने अपना पिछला मैच सितंबर 2018 में एशिया कप के दौरान खेला था। तब पाकिस्तान के खिलाफ वे चोटिल हो गए थे। इसके बाद उन्हें टीम से बाहर रहना पड़ा था।
माउंट माउनगानुई में पहली बार खेलने उतरेगी टीम इंडिया
माउंट माउनगानुई में दोनों टीमें पहली बार आमने-सामने होंगी। न्यूजीलैंड यहां अब तक छह वनडे खेल चुका है। इसमें से उसने तीन जीते और तीन हारे हैं। वह इस साल यहां दो वनडे खेली है, जिनमें से दोनों ही उसने जीते हैं। इस पिच पर सर्वश्रेष्ठ स्कोर सात विकेट पर 371 है, जिसे 2009 में न्यूजीलैंड ने श्रीलंका के खिलाफ बनाया था न्यूजीलैंड ने वह मुकाबला 45 रन से जीता था। सीरीज का तीसरा वनडे 28 जनवरी को इसी मैदान पर होना है।
शुभमन को मिल सकता है डेब्यू का मौका
माउंट माउनगानुई की पिच पारंपरिक तौर पर तेज गेंदबाजों को मदद करती है। पहले वनडे में टीम इंडिया ने तेज गेंदबाज के तौर पर भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी, जबकि ऑलराउंडर के तौर पर विजय शंकर को खिलाया था। विजय दाएं हाथ के तेज गेंदबाज हैं। केदार जाधव ने वैकल्पिक गेंदबाज के तौर पर तीन ओवर फेंके थे, जिसमें उन्होंने 17 रन दिए थे। ऐसे में टीम प्रबंधन शुभमन गिल को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने का मौका दे सकता है। शुभमन पार्टटाइम गेंदबाज की भूमिका भी निभा सकते हैं।
न्यूजीलैंड भी कर सकता है एक बदलाव
न्यूजीलैंड की टीम भी अपने प्लेइंग-11 में एक बदलाव कर सकती है। पिछले वनडे में न्यूजीलैंड के लॉकी फर्ग्युसन और टिम साउदी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। फर्ग्युसन बल्लेबाज के तौर पर भी असफल रहे थे। न्यूजीलैंड टीम में मिशेल सैंटनर एकमात्र स्पिनर हैं। ऐसे में न्यूजीलैंड टीम प्रबंधन दूसरे वनडे में ईश सोढ़ी को अंतिम-एकादश में शामिल कर सकता है।
टीमें इस प्रकार हैं :
भारत : विराट कोहली (कप्तान), रोहित शर्मा, शिखर धवन, शुभमन गिल, दिनेश कार्तिक, महेंद्र सिंह धोनी, केदार जाधव, विजय शंकर, भुवनेश्वर कुमार, कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल और मोहम्मद शमी।
न्यूजीलैंड : केन विलियम्सन (कप्तान), मार्टिन गुप्टिल, कॉलिन मुनरो, रॉस टेलर, टॉम लाथम, मिशेल सैंटनर, लॉकी फर्ग्युसन, ईश सोढ़ी, ट्रेंट बोल्ट, हेनरी निकोलस और टिम साउदी।
Friday, January 25, 2019
Thursday, January 17, 2019
ज्वैलर की दुकान में सेंधमारी, पांच किलो चांदी, 50 ग्राम सोना और 60 हजार ले उड़े चोर
भोपाल। बुधवार-गुरवार की दरमियानी रात कटारा थाना क्षेत्र में एक ज्वैलर की दुकान में चोर सेंधमारी कर पांच किलो चांदी, 50 ग्राम सोना और करीब 60 हजार रुपए नगद समेटकर ले गई। घटना की जानकारी गुरुवार सुबह लोगों को लगी। पुलिस मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार कटारा थाना क्षेत्र लहारपुर मार्केट में मनीष की राधारानी नाम से ज्वैलर्स की दुकान है। बुधवार रात करीब आठ बजे वह दुकान बंद करके घर चले गए थे। बुधवार-गुरवार की दरमियानी रात चोरों ने उनकी दुकान में पीछे की तरह से चार इंची दीवार तोड़ सेंधमारी कर दी। चोरों ने दीवार में करीब दो फीट का छेद कर अंदर घुस गए। दुकान में अंदर घुसने के बाद चोरों ने तिजोरी तोड़ी और पांच किलो चांदी, 50 ग्राम सोना और 60 हजार रुपए नगद ले गए।
पुलिस के अनुसार चोरों ने पहले ही दुकान की रैकी कर ली होगी। उन्हें इस बात का अंदाजा भी रहा होगा की दुकान की दीवार चार इंच की है। वारदात को अंजाम देने वालों की संख्या चार से पांच लोगों की हो सकती है। फिलहाल पुलिस के हाथ कुछ अहम सुराग लगे हैं।
कश्मीर पहुंचने वाला सिस्टम सीजन का सबसे स्ट्रांग होगा। इस वजह से उत्तरी इलाकों में भारी बर्फबारी होगी।
उत्तर भारत में बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में भी होगा। वहां से आने वाली सर्द हवा से ठंड बढ़ेगी।
सीजन की सबसे तेज ठंड की संभावना
वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एके शुक्ला ने बताया कि 18, 19, 20 जनवरी को तापमान में इजाफा हो सकता है। 21 जनवरी से भोपाल सीजन की सबसे तेज ठंड पड़ सकती है। शीतलहर भी चलने का अनुमान है। तापमान भी सामान्य से कम रहने का अनुमान है।
पिछले साल की जनवरी से इस बार ज्यादा ठंड
इस बार जनवरी पिछले साल की तुलना में ज्यादा सर्द है। अभी तक इस माह 17 में से सिर्फ 3 दिन ही रात का तापमान 10 डिग्री के पार पहुंच सका है। इनमें भी 8 दिन (7, 8, 9, 10, 15, 16 और 17 जनवरी) तो रात का तापमान 8 डिग्री से भी कम रहा। इससे पहले 2013 में जनवरी में ऐसी ठंड पड़ी थी। मौसम एक्सपर्ट एसके नायक ने बताया कि पिछले साल जनवरी के अंत में 25 जनवरी को सबसे कम तापमान 6.6 डिग्री रहा था। इस बार लगातार 16 दिन से मौसम सर्द है।
जानकारी के अनुसार कटारा थाना क्षेत्र लहारपुर मार्केट में मनीष की राधारानी नाम से ज्वैलर्स की दुकान है। बुधवार रात करीब आठ बजे वह दुकान बंद करके घर चले गए थे। बुधवार-गुरवार की दरमियानी रात चोरों ने उनकी दुकान में पीछे की तरह से चार इंची दीवार तोड़ सेंधमारी कर दी। चोरों ने दीवार में करीब दो फीट का छेद कर अंदर घुस गए। दुकान में अंदर घुसने के बाद चोरों ने तिजोरी तोड़ी और पांच किलो चांदी, 50 ग्राम सोना और 60 हजार रुपए नगद ले गए।
पुलिस के अनुसार चोरों ने पहले ही दुकान की रैकी कर ली होगी। उन्हें इस बात का अंदाजा भी रहा होगा की दुकान की दीवार चार इंच की है। वारदात को अंजाम देने वालों की संख्या चार से पांच लोगों की हो सकती है। फिलहाल पुलिस के हाथ कुछ अहम सुराग लगे हैं।
कश्मीर पहुंचने वाला सिस्टम सीजन का सबसे स्ट्रांग होगा। इस वजह से उत्तरी इलाकों में भारी बर्फबारी होगी।
उत्तर भारत में बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में भी होगा। वहां से आने वाली सर्द हवा से ठंड बढ़ेगी।
सीजन की सबसे तेज ठंड की संभावना
वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एके शुक्ला ने बताया कि 18, 19, 20 जनवरी को तापमान में इजाफा हो सकता है। 21 जनवरी से भोपाल सीजन की सबसे तेज ठंड पड़ सकती है। शीतलहर भी चलने का अनुमान है। तापमान भी सामान्य से कम रहने का अनुमान है।
पिछले साल की जनवरी से इस बार ज्यादा ठंड
इस बार जनवरी पिछले साल की तुलना में ज्यादा सर्द है। अभी तक इस माह 17 में से सिर्फ 3 दिन ही रात का तापमान 10 डिग्री के पार पहुंच सका है। इनमें भी 8 दिन (7, 8, 9, 10, 15, 16 और 17 जनवरी) तो रात का तापमान 8 डिग्री से भी कम रहा। इससे पहले 2013 में जनवरी में ऐसी ठंड पड़ी थी। मौसम एक्सपर्ट एसके नायक ने बताया कि पिछले साल जनवरी के अंत में 25 जनवरी को सबसे कम तापमान 6.6 डिग्री रहा था। इस बार लगातार 16 दिन से मौसम सर्द है।
Wednesday, January 9, 2019
सवर्ण आरक्षण बिल पर चर्चा शुरू, सपा ने कहा- ओबीसी के लिए 54% कोटा हो
नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने के लिए राज्यसभा में बुधवार को विधेयक पर चर्चा शुरू हो गई। बहस के दौरान विपक्ष ने मांग की कि संविधान संशोधन विधेयक को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। विपक्ष ने कहा कि हम बिल के खिलाफ नहीं हैं, हम बिल को पेश करने के सरकार के तरीके के खिलाफ हैं। सरकार ने कहा कि विपक्ष जानबूझकर विधेयक पारित होने की राह में रुकावट डाल रहा है। इस बीच, समाजवादी पार्टी ने मांग की कि ओबीसी को भी 54% कोटा दिया जाए।
भाजपा: सभी ने केवल घोषणा पत्र में कहा, मोदी सरकार ने कर दिखाया
भाजपा सदस्य प्रभात झा ने कहा- मंडल कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया था कि सामान्य वर्ग में गरीबों के लिए आरक्षण की व्यवस्था हो। तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव भी ऐसा ही चाहते थे। केवल नरेंद्र मोदी ने इसे पूरा किया है। हर राजनीतिक दल के घोषणा पत्र में कहा गया है कि सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए वह आरक्षण देंगे। लेकिन, इसे केवल मोदी सरकार ने पूरा किया। हमें विकास के लिए साथ खड़ा होना चाहिए।
कांग्रेस: छग, मप्र, राजस्थान में चुनाव जीतते तो आप यह बिल नहीं लाते
कांग्रेस सदस्य आनंद शर्मा ने कहा, "आप राजनीति के लिए ट्रिपल तलाक बिल लाए, मुस्लिम महिलाओं की बात की। लेकिन, दूसरी महिलाओं का क्या होगा? अगर आप मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनाव नहीं हारे होते तो यह सवर्ण आरक्षण बिल कभी नहीं लाते। जब आप जीत नहीं पाए तो आपने इस बारे में सोचा। भाजपा को अब अहसास हुआ कि कुछ गलती कर रहे हैं। कितने लोग 8 लाख से ज्यादा कमाते हैं? सच यह है कि लोगों के पास रोजगार नहीं है। लोगों का रोजगार छीना जा रहा है। हम बिल का विरोध नहीं कर रहे हैं, क्योंकि हम भी इस मुद्दे का समर्थन करते हैं।"
सपा: आप ईमानदार होते तो 2-3 साल पहले बिल लाते
सपा सदस्य रामगोपाल यादव ने कहा, "मैं इस बिल का समर्थन करता हूं। लेकिन, यह कहना चाहता हूं कि यह बिल तो कभी भी लाया जा सकता था। इस बिल का मकसद 2019 के चुनाव हैं। अगर आपके भीतर ईमानदारी होती तो यह बिल आप 2-3 साल पहले लाते। 98 फीसदी उच्च वर्ग 8 लाख से कम कमाता है। आप इतने सारे लोगों को 10 फीसदी में कैसे समेट सकते हैं। आपने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई 50% की सीमा तोड़ने की कोशिश की। क्या कह अदालत में टिक पाएगा। हमारी मांग है कि ओबीसी को उनकी जनसंख्या के आधार पर 54% रिजर्वेशन दिया जाए। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर मुस्लिमों को आरक्षण दिया जाए।"
कांग्रेस-सपा के समर्थन से सरकार की राह आसान
मंगलवार को पांच घंटे चली बहस के बाद यह लोकसभा में पास हो गया था। लोकसभा में भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल होने के चलते यह आसानी से पास हो गया। विधेयक के पक्ष में 323 और विरोध में 3 वोट पड़े। चर्चा के दौरान कांग्रेस-सपा-बसपा ने समर्थन की बात कही। हालांकि, विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा चुनाव नजदीक होने पर इस बिल को लाने के लिए सरकार की मंशा पर सवाल जरूर उठाए। अगर राज्यसभा में भी ये पार्टियां समर्थन देती हैं तो मोदी सरकार के लिए बिल पास कराने की राह आसान हो जाएगी।
राज्यसभा में सांसदों की मौजूद संख्या 244 है। बिल पारित कराने के लिए वहां दो तिहाई सांसदों यानी 163 वोटों की जरूरत होगी। भाजपा (73) समेत एनडीए के पास 88 सांसद हैं। इनके अलावा बिल का समर्थन करने वाले विपक्षी दलों के राज्यसभा में 108 सांसद हैं। अगर लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी ये सभी दल बिल का समर्थन करते हैं तो सांसदों की संख्या 196 हो जाएगी। जो जरूरी संख्याबल 163 से काफी ज्यादा है।
भाजपा: सभी ने केवल घोषणा पत्र में कहा, मोदी सरकार ने कर दिखाया
भाजपा सदस्य प्रभात झा ने कहा- मंडल कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया था कि सामान्य वर्ग में गरीबों के लिए आरक्षण की व्यवस्था हो। तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव भी ऐसा ही चाहते थे। केवल नरेंद्र मोदी ने इसे पूरा किया है। हर राजनीतिक दल के घोषणा पत्र में कहा गया है कि सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए वह आरक्षण देंगे। लेकिन, इसे केवल मोदी सरकार ने पूरा किया। हमें विकास के लिए साथ खड़ा होना चाहिए।
कांग्रेस: छग, मप्र, राजस्थान में चुनाव जीतते तो आप यह बिल नहीं लाते
कांग्रेस सदस्य आनंद शर्मा ने कहा, "आप राजनीति के लिए ट्रिपल तलाक बिल लाए, मुस्लिम महिलाओं की बात की। लेकिन, दूसरी महिलाओं का क्या होगा? अगर आप मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनाव नहीं हारे होते तो यह सवर्ण आरक्षण बिल कभी नहीं लाते। जब आप जीत नहीं पाए तो आपने इस बारे में सोचा। भाजपा को अब अहसास हुआ कि कुछ गलती कर रहे हैं। कितने लोग 8 लाख से ज्यादा कमाते हैं? सच यह है कि लोगों के पास रोजगार नहीं है। लोगों का रोजगार छीना जा रहा है। हम बिल का विरोध नहीं कर रहे हैं, क्योंकि हम भी इस मुद्दे का समर्थन करते हैं।"
सपा: आप ईमानदार होते तो 2-3 साल पहले बिल लाते
सपा सदस्य रामगोपाल यादव ने कहा, "मैं इस बिल का समर्थन करता हूं। लेकिन, यह कहना चाहता हूं कि यह बिल तो कभी भी लाया जा सकता था। इस बिल का मकसद 2019 के चुनाव हैं। अगर आपके भीतर ईमानदारी होती तो यह बिल आप 2-3 साल पहले लाते। 98 फीसदी उच्च वर्ग 8 लाख से कम कमाता है। आप इतने सारे लोगों को 10 फीसदी में कैसे समेट सकते हैं। आपने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई 50% की सीमा तोड़ने की कोशिश की। क्या कह अदालत में टिक पाएगा। हमारी मांग है कि ओबीसी को उनकी जनसंख्या के आधार पर 54% रिजर्वेशन दिया जाए। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर मुस्लिमों को आरक्षण दिया जाए।"
कांग्रेस-सपा के समर्थन से सरकार की राह आसान
मंगलवार को पांच घंटे चली बहस के बाद यह लोकसभा में पास हो गया था। लोकसभा में भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल होने के चलते यह आसानी से पास हो गया। विधेयक के पक्ष में 323 और विरोध में 3 वोट पड़े। चर्चा के दौरान कांग्रेस-सपा-बसपा ने समर्थन की बात कही। हालांकि, विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा चुनाव नजदीक होने पर इस बिल को लाने के लिए सरकार की मंशा पर सवाल जरूर उठाए। अगर राज्यसभा में भी ये पार्टियां समर्थन देती हैं तो मोदी सरकार के लिए बिल पास कराने की राह आसान हो जाएगी।
राज्यसभा में सांसदों की मौजूद संख्या 244 है। बिल पारित कराने के लिए वहां दो तिहाई सांसदों यानी 163 वोटों की जरूरत होगी। भाजपा (73) समेत एनडीए के पास 88 सांसद हैं। इनके अलावा बिल का समर्थन करने वाले विपक्षी दलों के राज्यसभा में 108 सांसद हैं। अगर लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी ये सभी दल बिल का समर्थन करते हैं तो सांसदों की संख्या 196 हो जाएगी। जो जरूरी संख्याबल 163 से काफी ज्यादा है।
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